Sunday, 6 September 2020

बरसने को है



वक़्त महदूद है पर, ख़्वाब बेहिसाब ,

फ़ानी शरीर में क़ैद, तड़पती रूह के कुछ असरार ,

कहदो फ़लक से , कि रात होने को है ,

फ़िर एक बादल की नफ़्स, बरसने को है  

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