केहते हैं आतिश है तेरे शायराना अंदाज़ में ,
रात भर उन अल्फ़ाज़ों में हम उलझे रहे ,
मुसलसल तजस्सुस बरक़रार थी यहाँ भी ,
और वो कहते हैं कि हम नींदों में सोते रहे
- S.S
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