मुज़्दा है शहरयार के अंजुमन में,
क़रीब है अज़ल कि राह ,
ज़िन्दग़ी की मुख़्तसर हिक़ायत में ,
क़बूल होने को है ग़र्दिश -ए -अय्याम की चाह
- S.S
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