केहते हैं आतिश है तेरे शायराना अंदाज़ में ,
रात भर उन अल्फ़ाज़ों में हम उलझे रहे ,
मुसलसल तजस्सुस बरक़रार थी यहाँ भी ,
और वो कहते हैं कि हम नींदों में सोते रहे
- S.S
केहते हैं आतिश है तेरे शायराना अंदाज़ में ,
रात भर उन अल्फ़ाज़ों में हम उलझे रहे ,
मुसलसल तजस्सुस बरक़रार थी यहाँ भी ,
और वो कहते हैं कि हम नींदों में सोते रहे
- S.S
जवाज़ ना मांगे कोई , ना कोई तशरीह ,
ज़माने की हो चाहे रिवायत कुछ भी ,
ये बयाँ करने में मुझे कोई हया नहीं ,
कि तू आफ़ताब बन गया है , अफ़सुर्दा ज़मीं पे मेरी
- S.S
वक़्त महदूद है पर, ख़्वाब बेहिसाब ,
फ़ानी शरीर में क़ैद, तड़पती रूह के कुछ असरार ,
कहदो फ़लक से , कि रात होने को है ,
फ़िर एक बादल की नफ़्स, बरसने को है