Monday, 9 May 2022

Ek Awaaz.........

 कुछ दूर हि सही , पर एक आवाज़ क़ायम है, 

जहाँ शिकस्त रूहों का एक ओझा रहता  है,

और एक अबशार के सरसराते आब जू के उस पार,

जकड़ी कुछ नफ़ीस रूहें आज़ाद हो जाती हैं


                       ~S.S~


Kuchh door hi sahi, par ek awaaz qaayam hai,

Jahan shiqast roohon ka ek ojha rehta hai,

Aur ek abshaar ke sarsaraate aab joo ke uss paar,

Jakdee kuchh nafees roohein aazaad ho jaati hain......


                      ~S.S~


Sunday, 13 September 2020

आतिश







केहते  हैं  आतिश  है  तेरे  शायराना  अंदाज़  में ,

रात  भर  उन  अल्फ़ाज़ों  में  हम  उलझे  रहे ,

मुसलसल  तजस्सुस  बरक़रार  थी  यहाँ  भी ,

और  वो  कहते  हैं  कि  हम  नींदों  में  सोते  रहे 


- S.S

Saturday, 12 September 2020

Aaftaab

Girl Looking Moon Stock Illustrations – 451 Girl Looking Moon Stock  Illustrations, Vectors & Clipart - Dreamstime

 जवाज़  ना  मांगे  कोई , ना  कोई  तशरीह ,

ज़माने  की  हो  चाहे  रिवायत  कुछ  भी ,

ये  बयाँ  करने  में  मुझे  कोई  हया  नहीं ,

कि  तू  आफ़ताब  बन  गया  है , अफ़सुर्दा  ज़मीं  पे  मेरी 


- S.S 

Sunday, 6 September 2020

बरसने को है



वक़्त महदूद है पर, ख़्वाब बेहिसाब ,

फ़ानी शरीर में क़ैद, तड़पती रूह के कुछ असरार ,

कहदो फ़लक से , कि रात होने को है ,

फ़िर एक बादल की नफ़्स, बरसने को है  

Friday, 4 September 2020

शहरयार

       


मुज़्दा  है  शहरयार  के  अंजुमन  में,

क़रीब  है  अज़ल  कि  राह ,

ज़िन्दग़ी  की  मुख़्तसर  हिक़ायत  में ,

क़बूल  होने  को  है  ग़र्दिश -ए -अय्याम  की  चाह  


                   - S.S

मुसव्विर




                                                                     मुसव्विर हूँ ,

                                                           आज़ार भरी ज़िन्दगी को ,                               

                                                     तफ़क्कों से रंगने कि फ़िराक़ में                  


                                                                        - S.S








                               

Wednesday, 20 September 2017

जुनून.......

बंद उम्मीदों के मकान से,
परिंदा बन उड़ चला एक ख्वाब,
सुन ज़रा ठेहेरकर ,
कुछ कहती है रूह की आवाज़,
जैसे अश्क़ों के दरिया से,
निकल चली एक बूँद,
रुख़ करती पहाड़ों का,
उस बारिश के भरोसे,
बिन काशीदगी , लिए इश्क़ का जुनून ....... 

(c) S.S