Wednesday, 20 September 2017

जुनून.......

बंद उम्मीदों के मकान से,
परिंदा बन उड़ चला एक ख्वाब,
सुन ज़रा ठेहेरकर ,
कुछ कहती है रूह की आवाज़,
जैसे अश्क़ों के दरिया से,
निकल चली एक बूँद,
रुख़ करती पहाड़ों का,
उस बारिश के भरोसे,
बिन काशीदगी , लिए इश्क़ का जुनून ....... 

(c) S.S


Saturday, 6 May 2017

क़ाश........

क़ाश कि एक बूँद ऐसी भी हो,
जिसमें अश्क़ों का समंदर हो,
एक राहत का किनारा भी हो,
जहां शफ़ीक़ रूहों का बसेरा हो........

(c) S.S

Thursday, 4 May 2017

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आज जब बादलों से मुलाक़ात हुई,
जी भर शिक़ायतें की,
आख़िर में एक गुज़ारिश भी,
और कुछ देर के लिए बारिश बन गयी,
दूर जब एक दोस्त की ज़मीन पर बरसी,
तो कहने लगा,
बस, अब हंसदे , तेरे अश्क़ों का सैलाब ,
देखा नहीं जाता ......... 

(c) S.S



Wednesday, 8 March 2017

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बरसते हुए बादलों ने एक नज़्म वह सुनाई,
हर बूँद में बिखरी हुई थी , मेरी रूह की रुसवाई,
कुछ कहते न बना,
न कुछ सुनते,
बस डूबती चली गई , और नापती रही हर गिरदब कि गहराई,

(c) S.S

Saturday, 21 January 2017

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मुरझाते इक फूल ने ,
ज़ाहिर की ख़ुशबू को इक बात,
"जानते हैं हम कि बदल जाएगा वक़्त,
मग़र कमी से आपकी जी ना पाएंगे,
क्या निभाएंगे साथ?"
हँसते हुए कहा ख़ुशबू ने,
"आप तो हमारे पीछे हि हो चले,
चाहिए ना इतना,
कीजिये ना अब और कुछ भी ज़ाहिर,
तकलीफ ज़रा काम होगी.... "

(c) SS






Friday, 20 January 2017

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कदम तो तेज़ थे,
पर रफ़्तार ढलती रही,
कुछ अश्क़ों में, कुछ हसरतों में,
ज़िन्दगी बेनाम सी बेहति रही,
रुके दो पल,
तो साथ देते दो और कदमों के निशाँ दिखे,
मंज़र कुछ ये है,
कि अब अकेले चलने से डर सा लगता है......

(c) SS

Sunday, 15 January 2017

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 ये ज़रूरी नहीं कि हर दिल में कोई खूबसूरत यादें हो,
इस दिल में बोहोत सारे शक़्स हैं,
हर किसीके हाथ में,
इसके छोटे छोटे टुकड़े हैं,
जिसे इन सबने, बोहोत ही दिलचस्पी से तोड़ा है,
ज़ाहिर है कि जब कोई जोड़ने वाला आए,
तो दिल वापस अपना वजूद ढूंढने निकल पड़ता है.....

(c) SS


Friday, 13 January 2017

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लोग कहते नहीं थकते,
अश्क़ गिरते नहीं रुकते,
सोचती हूँ ,
आख़िर अपनी ख़ुशी रखना
गुनाह है या सिर्फ़ मुश्क़िल....

(c) S.S


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कुछ बातें केहकर भी बयां नहीं हो सकती,
ये वो दिलचस्प मुश्किलें हैं,
जो चाहकर भी आसां नहीं हो सकती....

(c) S.S

Wednesday, 11 January 2017

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ऐसी भी भला क्या है मुश्क़िल,
क्यों दिल इतना है नाक़ाबिल,
रोके नहीं रुकती कुछ गेहराती चाहतें,
आज कल हमारी हर बात में,
सिर्फ़ आपका ज़िक्र है शामिल.... 

(c) SS


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क्या थी वो आहट , जो आई थी चुपके से,
और दबे पाँव गुज़रती हुई, तबाह कर गई....

(c) S.S


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मोहब्बत की ठोकर भी अजीब है,
इक बार सौ बार के बराबर है,

जब उससे  मात पड़े जिसे सब कुछ देदिया हो,
तो फ़िर प्यार के नाम से भी काँप उठना जायज़ है,
हर उस इंसान से, जो रौशनी दिखाए,
दूरी बनाना जायज़ है,
यक़ीन करने की इक और क़ोशिश से ,
महरूम रेहना जायज़ है,

पर फड़फड़ाती रूह पर इतनी सख़्ती बरतना ,
क्या ये जायज़ है?
परों को यूँ हमेशा के लिए काट फैंकना ,
क्या ये जायज़ है?
ख़ुद को अँधेरों  के दामन में मजबूरन ज़िंदा रखना  ,
क्या ये जायज़ है?

(c) S.S



Monday, 9 January 2017

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ज़िन्दगी इक गीली ज़मीं हो गयी है,
Life has become a wet sand,
हर सुबह सिर्फ ख़ामोशी भरी रात बनगई है,
Every morning has become a silent night,
चलूँ भी तो भला किस रास्ते पर,
Which way must I walk upon,
हर तरफ पाऊँ फ़िसलते हैं.......
I slip wherever I go...... 

(c) S.S



Sunday, 8 January 2017

Untitled....

ये ज़रूरी तो नहीं कि हर दर्द जुबां पर आए,
It isn't important that every pain is uttered,
ये ज़रूरी तो नहीं कि हर अश्क़ आँखों को सजाए,
It is not important that every tear must adorn the eyes,
कुछ अल्फ़ाज़ वो मन्नतें होती हैं,
Some words are those prayers,
जो तब तक ख़ामोशी में रहे तो बेहतर हैं,
Which are better silent,
जब तक नसीब न बाँजाऐं ....
Until they become the destiny....

(c) S.S

Saturday, 7 January 2017

बेइन्साफ़ हसरतें (Wishes are Unjust)

हसरतें भी बड़ी बेइन्साफ़ होती हैं,
Desires/wishes are very unjust,
बनते हुए तो मुस्कुराते नहीं रुकती ,
they can't resist smiling when in making,
और टूटती हैं तो रूह को बिखेर जाती हैं....
But when broken, they leave the soul scattered....

(c) S.S