Thursday, 4 May 2017

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आज जब बादलों से मुलाक़ात हुई,
जी भर शिक़ायतें की,
आख़िर में एक गुज़ारिश भी,
और कुछ देर के लिए बारिश बन गयी,
दूर जब एक दोस्त की ज़मीन पर बरसी,
तो कहने लगा,
बस, अब हंसदे , तेरे अश्क़ों का सैलाब ,
देखा नहीं जाता ......... 

(c) S.S



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