Rooh ki Awaaz
Saturday, 6 May 2017
क़ाश........
क़ाश कि एक बूँद ऐसी भी हो,
जिसमें अश्क़ों का समंदर हो,
एक राहत का किनारा भी हो,
जहां शफ़ीक़ रूहों का बसेरा हो........
(c) S.S
Thursday, 4 May 2017
....
आज जब बादलों से मुलाक़ात हुई,
जी भर शिक़ायतें की,
आख़िर में एक गुज़ारिश भी,
और कुछ देर के लिए बारिश बन गयी,
दूर जब एक दोस्त की ज़मीन पर बरसी,
तो कहने लगा,
बस, अब हंसदे , तेरे अश्क़ों का सैलाब ,
देखा नहीं जाता .........
(c) S.S
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)