Rooh ki Awaaz
Monday, 14 November 2016
ख़ामोशी
ख़ामोशी है ख़ुशी , अग़र बिन लफ़्ज़ की हो उम्मीद ,
पर बन जाती है बेबसी , जब हमराज़ कि हो कमी,
छुपाना ख़ूब आता है इस दिल को,
पर वो कुछ कहें तो सही.....
(c) S.S
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