बंदिशें भी बड़ी दिलचस्प होती हैं, (Bounds are very interesting,)
एक तरफ़ तो रूह फ़रार होना चाहती है,
(When the soul wishes to escape,)
और इक तरफ़ बंधे बंधे फ़ना होजाने की ख़्वाहिश में है...
(And at the same time, wishes to be destroyed in chains....)
इत्तिफ़ाक़ हि तो है, जो दो लोग मिलजाते हैं,
जज़्बात हि तो हैं, जो रिश्ते रूहानी बनजाते हैं,
दो चार क़दम चलते हि, राहें एक हो जाती हैं,
और कुछ वादों के रहते, मंज़िलें भी मिलजाती हैं....
कमी अल्फ़ाज़ों की नहीं ,
वक़्त की है ,
नमी ज़ख्मों की नहीं ,
जज़्बातों की है,
चोट लगने पर तो सब रोते हैं,
पर अश्क़ जो होकर भी ना बहें ,
अक़्सर इश्क़ की मुक़म्मल दास्ताँ वही बयाँ करते हैं........