Thursday, 17 November 2016

बंदिशें - Bounds

बंदिशें भी बड़ी दिलचस्प होती हैं,
 (Bounds are very interesting,)
एक तरफ़ तो रूह फ़रार होना चाहती है,
(When the soul wishes to escape,)
और इक तरफ़ बंधे बंधे फ़ना होजाने की ख़्वाहिश में है...
(And at the same time, wishes to be destroyed in chains....)

(c) S.S



Monday, 14 November 2016

ख़ामोशी

ख़ामोशी है ख़ुशी , अग़र बिन लफ़्ज़ की हो उम्मीद ,
पर बन जाती है बेबसी , जब हमराज़ कि हो कमी,
छुपाना ख़ूब आता है इस दिल को,
पर वो कुछ कहें तो सही.....

(c) S.S


........!

इत्तिफ़ाक़ हि तो है, जो दो लोग मिलजाते हैं,
जज़्बात हि तो हैं, जो रिश्ते रूहानी बनजाते हैं,
दो चार क़दम चलते हि, राहें एक हो जाती हैं,
और कुछ वादों के रहते, मंज़िलें भी मिलजाती हैं....

(c) S.S

Monday, 7 November 2016

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ठेहेरजा ऐ मेरे ख़ुदा ,
ऐसी भी भला क्या नाराज़गी,
तक़दीर कि लक़ीरें अन्जान रास्ते बनगई हैं,
मेहेज़ इक मज़ाक सि रहगई हैं ज़िंदगी,
यक़ीन करें भी तो किसपर,
दुआएं भी झूठ सि लगती हैं,
सही ग़लत सब सिर्फ़ ग़लत है,
जहन्नुम से भी ख़ौफ़नाक लगती है अब ज़िंदगी.... 

(c) S.S

Wednesday, 2 November 2016

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वक़्त से केहदो कि साँसों कि रफ़्तार से रीस ना करे,
क़श्ती पलटने में अभी कुछ देर है.... 

(c) S.S


Tuesday, 1 November 2016

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कमी अल्फ़ाज़ों की नहीं ,
वक़्त की है ,
नमी ज़ख्मों की नहीं ,
जज़्बातों की है,
चोट लगने पर तो सब रोते हैं,
पर अश्क़ जो होकर भी ना बहें ,
अक़्सर इश्क़ की मुक़म्मल दास्ताँ वही बयाँ करते हैं........

(c) S.S