Wednesday, 20 September 2017

जुनून.......

बंद उम्मीदों के मकान से,
परिंदा बन उड़ चला एक ख्वाब,
सुन ज़रा ठेहेरकर ,
कुछ कहती है रूह की आवाज़,
जैसे अश्क़ों के दरिया से,
निकल चली एक बूँद,
रुख़ करती पहाड़ों का,
उस बारिश के भरोसे,
बिन काशीदगी , लिए इश्क़ का जुनून ....... 

(c) S.S