Thursday, 21 January 2016

Koi Farq Nahi....


(c) शिल्पा सन्देश


आवाज़ तो है वही,
पर बातें वो हैं नही,
जहाँ थी हवा में भी हंसी,
अब रहती हर वक़्त है नमी,

शिक़ायत भी करें तो किसे,
सुना है की सुनने के लिए भी,
ज़रुरत होती है दिल की,
पर जो हो चूका है पत्थर ,
अब उससे कहें भी तो क्या कहें,

तू तो है देखता सब कुछ,
गलत क्या और क्या है सही,
जीते तो पेड़ पौधे और पंछी भी हैं,
फिर मुझमे और उनमें,
कोई फ़र्क  नहीं....