Monday, 28 December 2015

Lehrein

(c) Shilpa Sandesh

Umadtee huee,
Thhiraktee huee,
Behtee hain,
Aakhir yeh leherein bhi toh,
Kabhi thhaktee hongi.... 

Thursday, 1 January 2015

Kho Jaane Do!

(c) शिल्पा सन्देश

छलकने दो
बेहजाने दो ,
आाज कुछ और बूंदों को
खो जाने दो ;

रैना अभी बाकी है
गहराता अँधेरा है ,
निशा के इस मौन में
कुछ और दर्द
खो जाने दो;

नींद है पता अब खो चुकी
इन निराश आँखों पर
अब अश्कों का बसेरा है,
आज इस पवन के संग
हर सपने को
खो जाने दो;

वेदना ने है ढूंढ लिया
पता नया घर के अपना,
मेहमान समझ लिया था मैंने
किस्मत पर वह कब्ज़ा कर बैठे हैं,
आज गुज़रते हर पल में
हर एक याद
खो जाने दो;

अब और नहीं होता सबर
बाँध हर टूटने को है,
हर लम्हा यह मंन भरा सा है
हर सांस पर लगा पहरा सा है,
आज इस यामिनी में,
मुझे  कहीं खो जाने दो;

रिश्ते नाते सब खेल हैं
परीक्षाएँ हैं बहुत हो चुकीं,
अब इस जग से,
आज़ाद यूँ हो जाने दो मुझे कहीं खो जाने दो,
अब मुझे कहीं खो जाने दो!